सत्य व्यास

सत्य व्यास पहले बनारस के बारे में लिखा, फिर दिल्ली के बारे में | कहते हैं बोकारो दिल में रहता है. अभी तक रह कलकत्ता में रहे थे. आदमी कम, नक्शा ज़्यादा है. इतना घूमे हैं कि नारद जी भी शरमा जायें. लिखते जबर हैं. फिल्मों और क्रिकेट का कीड़ा है. क्रिकेट की नॉस्टेल्जिया लहसुन-प्याज़ से छौंक के पेश करते हैं. आप लबराते फिरेंगे.

अस्सी के दशक में बूढ़े हुए। नब्बे के दशक में जवान। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में बचपना गुजरा और कहते हैं कि नई सदी के दूसरे दशक में पैदा हुए हैं। अब जब पैदा ही हुए हैं तो खूब उत्पात मचा रहे हैं। चाहते हैं कि उन्हें कॉस्मोपॉलिटन कहा जाए। हालाँकि देश से बाहर बस भूटान गए हैं। पूछने पर बता नहीं पाते कि कहाँ के हैं। उत्तर प्रदेश से जड़ें जुड़ी हैं। २० साल तक जब खुद को बिहारी कहने का सुख लिया तो अचानक ही बताया गया कि अब तुम झारखंडी हो। उसमें भी खुश हैं। खुद जियो औरों को भी जीने दो के धर्म में विश्वास करते हैं और एक साथ कई-कई चीजें लिखते हैं। अंतर्मुखी हैं इसलिए फोन की जगह ईमेल पर ज्यादा मिलते हैं। हाल ही में छपा इनका दूसरा उपन्यास ‘दिल्ली दरबार’ ख़ूब नाम कमा रहा है।

About

Satya Vyas is from the current generation of professionals-turned-amateur writers. A law graduate from the prestigious law school BHU, and a logistics professional, Satya Vyas has created a niche for himself in new age Hindi writing. His first novel Banaras Talkies is a bestseller, with seven editions (and counting) in one year. The novel has also been selected as one of the top 5 Hindi books of 2015 by Amazon India. Dilli Darbaar is his second novel. An avid reader, a blogger, a poet by heart and a raw rhymer, he is currently working on a couple of screenplays as well. He presently resides in Rourkela.
He can be contacted at info@satyavyas.com

Dilli Darbar

दिल्ली दरबार छोटे शहरों के युवाओं के दिल्ली प्रवास, प्रेम, प्रयास और परेशानियों की एक प्रहसनात्मक कहानी है। यह लापरवाह इश्क से जिम्मेदार प्रेम की परिणति तक की एक खुशहाल यात्रा है। यह कहानी दरअसल उन लाखों युवाओं के जीवनशैली की भी है जो बेहतर जिंदगी और भविष्य की संभावनाओं के लिए दिल्ली जैसे महानगर का रास्ता लेते हैं। मनोरंजक ढंग से कही गई इस कहानी के केंद्र में टेक्नो गीक 'राहुल मिश्रा' है; जिसका मंत्र है 'सफलता का हमेशा एक छोटा रास्ता है'

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Banaras Talkies

बनारस टॉकीज़ साल 2015 का सबसे ज़्यादा चर्चित हिंदी उपन्यास है। साल 2016 और 2017 में भी ख़ूब पढ़े जाने का बल बनाए हुए है। सत्य व्यास का लिखा यह उपन्यास काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रावासीय जीवन का जो रेखाचित्र खींचता है वो हिंदी उपन्यास लेखन में पहले कभी देखने को नहीं मिला। इस किताब की भाषा में वही औघड़पन तथा बनरासपन है जो इस शहर के जीवन में। सत्य व्यास 'नई वाली हिंदी’ के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक हैं।

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दिल्ली दरबार

कहते हैं कि बच्चे के भविष्य में उसके जन्म के साल के ग्रह-नक्षत्रों का बहुत योगदान होता है. राहुल मिश्रा जिस साल पैदा हुए उस साल फ़िल्मी दुनिया में प्यार, हमारी दुनिया में तकरार और आभासी दुनिया में ऑप्टिकल फाइबर के तार तेजी से फ़ैल रहे थे. जाहिर था कि इसका असर राहुल मिश्रा पर भी पड़ना था. पड़ा भी. --- दिल्ली दरबार का अंश

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"दिल्ली दरबार छोटे शहरों के युवाओं के दिल्ली प्रवास, प्रेम, प्रयास और परेशानियों की कहानी है. लापरवाह इश्क से जिम्मेदार प्रेम तक पहुंचने की कहानी. ये कहानी उन लाखों युवाओं की है जो बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली जैसे महानगरों की ओर कूच करते हैं." - Lallantop.com

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